कुछ बातें कहने के लिए होती हैं, कुछ सिर्फ़ रख देने के लिए। यह जगह दूसरी तरह की बातों के लिए है।
हम सब के भीतर कुछ ऐसा रहता है जो किसी से कहा नहीं जाता — किसी का चला जाना, किसी का बरसों इंतज़ार करना, कोई खबर जो जिसे देनी थी वो अब है ही नहीं। वो बातें अंदर पड़ी रहें तो भारी हो जाती हैं। लिख दी जाएँ तो थोड़ी हल्की।
मैं कोई बड़ा कवि नहीं हूँ। मैं बस वो लिखता हूँ जो उस वक़्त सच लगता है। कभी वो कविता बन जाती है, कभी सिर्फ़ चार पंक्तियाँ रह जाती हैं। दोनों यहीं रहेंगी।
अगर पढ़ते हुए कहीं आपको अपनी बात दिख जाए, तो शायद इसे लिखने का काम पूरा हुआ।