एक अगस्त की शाम थी, मैं घर में बैठा था और एक गीत अनायास ही मैंने यूट्यूब पर चला दिया…
पढ़िए →वो तुम हो, वो तुम हो, वो तुम हो
पढ़िए →ऋषिकेश में पार्वती नदी, पहाड़ और हरियाली। शादी के बाद जीवन में छोटे-मोटे समझौते करने पड़ते हैं, जैसे नदियाँ पहाड़ों के हिसाब से अपना रास्ता बनाती हैं।
पढ़िए →तस्वीरें एक अरसे बाद की बड़ी मुस्कान को कैद कर लेती हैं, लेकिन हमेशा सच नहीं कहती। धुंधली यादों को साफ करती हैं तस्वीरें।
पढ़िए →ये इश्क़ बुरी कोई चीज नहीं, जान देना इसमें नाकाफी है। अनसुलझे ख्याल में अक्सर याद बहुत वो आती है।
पढ़िए →1993-94 की बात है, तब स्कूल जाने की तत्कालीन उम्र 5 वर्ष हुआ करती थी तो पारंपरिक तौर पर अपने बुआ जी के विद्यालय में जाना होता था।
पढ़िए →इस श्रेणी में अभी कुछ नहीं।