एक अगस्त की शाम थी मैं घर में बैठा था और एक गीत अनायास ही मैंने यूट्यूब पर चला दिया !

तकदीर का फ़साना! जाकर किसे सुनायें?
इस दिल में जल रही हैं….. अरमान की चिताएँ!

और मुझे याद आ गयी मेरे बड़े मामाजी की, अभी विगत 29 जुलाई को जीवन में करीब 25-30 साल के लम्बे संघर्ष के बाद 52 वर्ष की आयु में उनका TGT में चयन हुआ।

और ये खबर जिसे वो सबसे पहले देना चाहते होंगे ! उनका बड़ा पुत्र “इशू” जो हमेशा से चाहता था कि पिताजी की नियुक्ति हो जाए, वो नहीं रहा! क्योंकि बचपन से उसने पिता के संघर्षों को देखा है। जिससे आप सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं ना सफलता की खबर आप उससे ही साझा करना चाहते हैं। वो आपके माँ-बाप हो सकते हैं…पत्नी या बच्चे हो सकते हैं।

आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि दिल कितना कचोटता होगा कि नानी होती, इशू होता तो सब कितने खुश होते! जीते जी नानी हमेशा मामा को लेकर चिंतित रहीं काश कि उन्हें हम बता पाते कि नानी रिपुंजय मामा अब मास्टर हो गए हैं।

यकीन मानिये उनका चहकता हुआ, मुस्कुराता हुआ चेहरा महसूस कर सकता हूँ।

कुछ पाया - कुछ छूट गया
आधा हिस्सा जैसे रूठ गया
बंद की आँखें जब मैंने
एक धारा सा फूट गया
कुछ पाया - कुछ छूट गया
रफ़्ता रफ़्ता झूले पर
वक़्त के साथ झूल गया

मुझे नहीं पता कि वो क्या महसूस करते होंगे और मैं अपने दुश्मनों को भी ऐसी अनुभूति हो ये नहीं चाहूंगा! लेकिन किसी इतने अपनों को खो देना, कुछ यूँ लगता होगा शायद!

एक ठंडी हवा के झोंके से
मैं अक्सर उसे महसूस करता हूँ
मैं रो नहीं सकता
मैं एक पिता हूँ
चलते-चलते मैं कई बार ठहर जाता हूँ
उसी पुराने सच से फिर सिहर जाता हूँ
मैं बिखर नहीं सकता
मैं एक पिता हूँ

ज़िन्दगी में इतने अन्धकार के बाद एक रौशनी हुई है और मैं चाहता हूँ कि आपकी ज़िन्दगी में अब कोई और अन्धकार न रहे। मैं चाहता हूँ कि आप खुश रहें!

जो चला गया उसे महसूस कीजिये
उसे याद कीजिये
और मुस्कुराइये।

वो भी यही चाहता होगा न?

— आलोक

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