तस्वीरें कैद कर लेती हैं,
एक अरसे बाद कि बड़ी सी मुस्कान।
तो चेहरे पर खुशी का तीखा तड़का।।
लेकिन तस्वीरें हमेसा सच नहीं कहती।
कई बार छुप जाता है,उमड़ रही जेहन में खूब सारे जज़्बात।।
कई शेर अधूरे रह जाते हैं, कई अधूरे शेर हम गुनगुनाते हैं।
तस्वीरें ना होतीं तो पुरखों के आशीर्वाद भी ना होते।
धुंधली यादों को साफ कर देती हैं, तस्वीरें।।
जब तक जिंदा हो तस्वीरें लेते रहो क्योंकि "अम्बर"।
सबको बन जाना है तस्वीर एक दिन।।
उस दिन आज की तस्वीरें बयां करेंगी, सिर्फ उतना।
जितना कैद हो पायेगा उस तस्वीर में।।
आज लेते हुए तस्वीरें ये ध्यान रखना।
ये तस्वीरें बयां करेंगी तुम्हें, जब तुम महज एक तस्वीर होगे।

— आलोक

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