ऋषिकेश से दर्जनों बार गुज़रे होंगे लेकिन हमेशा से ये रहा जेहन में की पहाड़ ऊंचाई पर ही खूबसूरत होते हैं। मैंने अभी तक के सबसे खूबसूरत पहाड़ तोष में देखी हैं।

पार्वती नदी, पहाड़ और खूब सारी हरियाली! बचपन मे सीनरी में भी ऐसी ही बनाते थे न? और ऋषिकेश में भी वही खूबसूरती है।

ज़िन्दगी में बदलाव बहुत होते हैं और एक सबसे बड़ा बदलाव होता है...शादी हो जाना और फिर सारी उम्र किसी के प्रति जवाबदेही तय हो जाना। यकीन मानिए आपको कभी भी नहीं लगेगा कि आप शादी के लिये तैयार हैं। हमेशा लगेगा कुछ और साल रुक सकते थे। लेकिन सच्चाई ये है कि शादी के लिये तैयार पहले से कोई नहीं होता, पहले शादी होती है, फिर ट्रेनिंग

ऋषिकेश में पहाड़ों, नदियों और पेड़ पौधों में जो सामन्जस्य है, वही बनाने की हुनर सीख रहा था। जीवन हो या सीनरी, खूबसूरती हमेसा साथ होने मात्र से नहीं, साथ होने पर जीवन भी सीनरी की तरह लगना चाहिये। लेकिन उसके लिये छोटे-2 समझौते करने पड़ते हैं।

1. जैसे नदियों को पहाड़ों के हिसाब से अपने रास्ते बनाने पड़ते हैं।

2.जैसे पहाड़ों को भी पेड़ों की जड़ों को अपने भीतर समाहित होने देना पड़ता है।

3.जैसे नदी को इंसानों, जानवरों की प्यास बुझानी पड़ती है।

4. जैसे बर्फ को पिघलना पड़ता है।

जीवन मे भी ऐसे छोटे-मोटे कई फेर बदल करने पड़ते हैं, जिससे जीवन और सीनरी दोनों खूबसूरत बनी रहें। ऋषिकेश में कुर्सी तोड़ते रहे और पहाड़ों को तकते रहे। कुछ अनकही, कुछ अनसुनी, कुछ वादे, कुछ ख्वाब अब अलविदा कह रहे थे। तो दिल कह रहा था को चलो फिर नये ख्वाब बुने जायें! नयी राह चुनी जाये.... हमसफर के साथ।

— आलोक

बातचीत / Comments

टिप्पणियाँ आ रही हैं… / loading…

आपकी टिप्पणी पढ़ने के बाद ही साइट पर दिखेगी — इसलिए तुरंत न दिखे तो घबराइए मत।
Comments appear once they have been read and approved.

← सारी रचनाएँ