तुम्हे पता है,

जो मुझे बुलाएगी एजी, वो तुम हो, जब मैं छोटा था तो सोचता था कि दो लोग जो प्यार में होते हैं वो ही शादी कर लेते हैं और फिर सब एकदम गज़ब चलता है।

बचपन की वो बात एकदम सही होती हुई दिख रही है।

बीवी को लेकर कोई परिकल्पना नहीं थी बस ये था कि जो वाइफ होगी ना उससे गज़ब की जुगलबंदी हो, और वो ना तुम हो।

ये भी था कि जब देखूँ तो प्यार आये, जब भी तुमसे झगड़ता हूँ तो तुम्हारा मासूम से चेहरा मेरे ख्यालों में मेरी नज़रों के सामने इर्द गिर्द घूमता रहता है, और फिर हम मना लेने की प्रक्रिया में आगे बढ़ते हैं।

जिसे मैं रूठे हुए नहीं छोड़ सकता, वो तुम हो!

मैं हमेशा सोचता था कि वो कौन होगी जिसके पल्लू मैं बांध दिया जाऊंगा, लेकिन वो तुम हो जिसके पल्लू मैं बंधना चाहता हूँ।

मैं ये चाहता हूँ कि जब तुम मेरे पास साड़ी पहनकर आओ तो पांव के पायल की आवाज़ महसूस होनी चाहिये, बदन की खुश्बू हवाओं में चासनी की तरह घुल जायें।

वो तुम हो जो सबसे खूबसूरत और सबसे प्यारी हो, जो कभी छोटे बच्चे की तरह आकर लिपट जाती है तो कभी बड़े की तरह समझाती है, तुम एक कम्पलीट पैकेज हो और मैं बेहद भाग्यशाली जिसे तुम नशीब हुई।

जिससे ता-उम्र इजहार करते हुए उम्रें गुज़ारना चाहता हूँ।

जिसको ता-उम्र प्रेम पत्र लिखना चाहता हूँ।।

जिसके बदन में लिपटे हुए नींदों से उठना चाहता हूँ।

वो तुम हो!

वो तुम हो जिसके होने से सबकुछ लाजवाब और जिसके ना होने से कुछ ना होने का एहसास होता है।

वो तुम हो जिससे जुड़े हुए हैं सारे ख्वाबों का दूसरा हिस्सा।

वो तुम हो जो हर राज की राजदार हो।

वो तुम हो जो हर खुशी की हिस्सेदार हो।।

वो तुम हो, वो तुम हो, वो तुम हो

वो तुम हो जिससे मुझे है बेइंतेहा मोहब्बत

- "अम्बर"

— आलोक

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