ये इश्क़ बुरी कोई चीज नहीं
जान देना इसमें नाकाफी है
अनसुलझे ख्याल में अक्सर
याद बहुत वो आती है।
जान देना इसमें नाकाफी है
अनसुलझे ख्याल में अक्सर
याद बहुत वो आती है।
ये इश्क़ बुरी कोई चीज नहीं है
ख्वाब देखने की आज़ादी है
मेरे घर के चौखट पर घूंघट में वो,
ख्वाब में अक्सर आती है।
ख्वाब देखने की आज़ादी है
मेरे घर के चौखट पर घूंघट में वो,
ख्वाब में अक्सर आती है।
ये इश्क़ बुरी कोई चीज नहीं है
ये कुदरत की बेबाकी है
ख्वाब में आता है एक चेहरा
मुझमे इश्क़ कहीं अभी बाकी है
ये कुदरत की बेबाकी है
ख्वाब में आता है एक चेहरा
मुझमे इश्क़ कहीं अभी बाकी है
ये इश्क़ बुरी कोई चीज नहीं है
— आलोक


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